हमें लोगो की मेहनत की प्रशंसा करनी चाहिए।

यह कहानी मेरे कॉलेज के दिनों की है में जब ११ वि कक्षा में था । हम सब क्लास में बैठे हैं हमारे मराठी के मैडम आते है सब शांत हो जाते है वो पाठ पढ़ना शुरू करते है सब शांत हो जाते है। उनका लेक्चर खत्म होने के बाद मैडम बताती हैं कि उनका कवितासंग्रह प्रकाशित हुआ है वो सब को दिखाती हैं कहती हैं आप लोग इसे पढ़े कविताओं को समझे पर । किसी में भी वह कवितासंग्रह लेने की उत्सुकता ही नहीं थी तभी मैने अपना हाथ उठाया और बोला मैडम मुझे चाहिए । मैडम के चेहरे में जो खुशी थी उसको में शब्दों में नहीं बता सकता ।  पर मुझे बाकी लोगो ने नहीं खरीदा इस बात का बहुत बुरा लगा। किसी की कला को हमे समझने की कोशिश टोह करनी चाहिए उनकी प्रशंसा करनी चाहिए,अगर में भी मैडम की किताब नहीं खरीदता तो उनका आत्मविश्वास कम हो जाता और एक अच्छी लेखिका जन्म नहीं लेती फिर कभी इस जमाने में ।  इस लिए कोई भी हो उनके काम को देखना चाहिए 
यह था वो कवितासंग्रह जो मेरी टीचर ने लिखा था ।

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