दोस्तो बीते कुछ सालों से शौर्य फिल्म का एक सीन काफी ज्यादा वायरल हो रहा हैं जिसमें केके मैनन है उनकी एक्टिंग जबरदस्त है । इस फिल्म को समर खान ने डायरेक्ट किया था वो एक मुस्लिम है इसलिए कुछ लोग इस फिल्म को और इसकी कहानी को प्रोपोगेंडा बोल रहे है । कुछ बोल रहे है कि आर्मी को बदनाम करने के लिए यह फिल्म बनाई गई है पर केके मैनन ने जबरदस्त एक्टिंग करके प्रोपोगेंडा की धज्जियां उड़ाई ऐसी बाते हो रही है ।
फिल्म की कहानी कुछ इस प्रकार है ब्रिगेडियर रुद्रप्रताप सिंह एक सच्चा देशभक्त और बहादुर इंसान है उसके लिए देश ही सबकुछ है वो देश के दुश्मनों को मारना चाहता है । पर उसके सात अनहोनी होती है उसके बीवी और परिवार वालों को जलाया जाता मुस्लिम व्यक्ति द्वारा जो उनका वफादार नौकर होता हैं। इस वजह से ब्रिगेडियर को बहुत दर्द पहुंचता और दिल में बदले की भावना जगती हैं वो ठान लेता है कि उनकी पूरी कोम का सफाया करना इसलिए वो अपने ऑफिसर राठौड़ के जरिए सबको मारने के लिए कहता है क्योंकि उसकी नजर में उस कोम के सभी लोग आतंकवादी हैं। जब राठौड़ बेगुनाह लोगों पर गोली चलाता है तो जावेद नाम के ऑफिसर को ये सहन नहीं होता वो राठौर पर गोली चलाता है । जावेद और ब्रिगेडियर पर मुकदमा चलता है।
मेजर सिद्धांत जावेद की तरफ से यह केस लड़ते है और ब्रिगेडियर को बोलते है कि " आपने क्या कहा कोम को खत्म करो इनकी ठीक है तो उस कोम को भी खत्म करो जिसने महात्मा गांधी को मारा या उस कोम को भी जिसने मार्टिन लूथर किंग को मारा "
ब्रिगेडियर रुद्रप्रताप कुछ लोगों की गलती की सजा पूरे धर्म को देना चाहता है जो कि गलत है। अगर कुछ लोगों की गलती की सजा पूरे धर्म को मिले तो कैसे होगा ये हम १९८४ के सिख विरोधी नरसंहार में देख चुके है।
पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी जी को उनके सुरक्षा रक्षकों ने गोली मार के हत्या की वो लोग सिख थे । इस वजह से सभी लोग सीखो को दोषी समझने लगे और जलाने लगे इस वजह से कितने बेगुनाह सिख मारे गए ।
तो देखा आपने की कुछ लोगों की गलती की सजा पूरे धर्म को मिले तो क्या होता हैं ऐसे बहुत उदाहरण है।
सोशल मीडिया पे रुद्रप्रताप की रील बनाकर फैलाई जा रही हैं सबने यह फिल्म ध्यान से देखी भी नहीं है बस छोटी सी रील देख के बोल रहे हैं कि रुद्रप्रताप सही इंसान है उसने जो किया सही है ।
आप लोग comments में बताओ कौन सही हैं और कौन गलत
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